मत दिखा कोई रास्ता मुझ को

तू भटकता ही छोड़ जा मुझ को

तू जिसे आसमाँ में ढूँढ़े है
मेरे अंदर ही मिल गया मुझ को

ख़त्म हो ही गई तलाश मेरी
आख़िरश मैं ने खो दिया मुझ को

मेरे सीने में कोई धड़के है
कौन है कुछ नहीं पता मुझ को

एक दिन मैं ने ख़ुद को ज़िंदा किया
और फिर मैं ही खा गया मुझ को

— Raaz Gurjar

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