हिस्सें में मेरे हैं यही जागीर बस
मत माँगना तुम मुझसे मेरी हीर बस
मेरा कोई झगड़ा नहीं तुम से मियाँ
छूना नहीं उसकी कोई तस्वीर बस
ख़ुशियाँ सभी अपनी तुझी पर वार दूँ
तू तोड़ दे नफ़रत की ये ज़ंजीर बस
असबाब कितने हैं यहाँ रक्खे हुए
पर चाहिए मुझको तिरी तस्वीर बस
मैं चूम लूँ तेरे लबों की ये महक
दे दे ख़ुदा मुझको भी ये तकदीर बस
हैं ख़ूबसूरत और नज़ारे भी मगर
पहले तो देखेंगे तेरी तस्वीर बस
स्वीकार हैं मुझको तो मरना भी अगर
तू मार दे हाथों से अपने तीर बस
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