उस के लिए कभी हम यारों से लड़ गए थे
इक बे-वफ़ा के ख़ातिर कितना बिगड़ गए थे
अब की करेंगे फोकस हम अपने कैरियर पर
वरना तो पहले दिल के चक्कर में पड़ गए थे
हमको नहीं पता है उस रात क्या हुआ था
सहरा बता रहे थे जंगल उजड़ गए थे
लेंगे न नाम अब वो मेले का ज़िंदगी भर
मेले में साथियों से वो जो बिछड़ गए थे
फ़ुर्क़त की रात थी वो दिल में अजब समाँ था
हम भी बिछड़ गए थे तुम भी बिछड़ गए थे
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