नदी उस पार के साथी अकेले रो रहे होंगे

निकल लेते हैं चल भाई अभी सब सो रहे होंगे

बिछड़ने के दुखों पर ये ख़ुशी मरहम लगाएगी
जो पागल कह रहे थे अब वो पागल हो रहे होंगे

— Atul K Rai

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