ज़ख़्म इतना गहरा था इंतिज़ार क्या करते।। ख़ुद ही निशाना बन गए थे वार क्या करते ।।मर गए हम, पर खुली रही आँखें हमारी,इस से ज़्यादा और उन का इंतिज़ार क्या करते।।— Raj Bajpai