सच बता देते तुम तो क्या होता
हद से हद ये कि मैं ख़फ़ा होता
यारों हम सब तो साथ वाले थे
कोई तो साथ भी रहा होता
प्यार तो काम था मेरा पर मैं
आदमी भी तो काम का होता
फ़ाख़्ता या तो मेरे होते पंख
या तो तुझ में ही हौसला होता
बेशक उस ने कहानी पढ़ ली थी
काश उनवान भी पढ़ा होता
ख़्वाब ही ने जगा के रक्खा है
वर्ना आदम तो सो चुका होता
बिन मोहब्बत के जी रहे थे हम
अपना होता भी कुछ तो क्या होता
क़ैस लैला का कौन होता जो वो
दुनिया-दारी में फँस गया होता
वैसे चिड़िया को गोद लेने से
अच्छा ये था उड़ा दिया होता
— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'















