ये हम जो हँस रहे हैं बेबसी पर

हमारा तंज़ है इस ज़िंदगी पर

हुआ ऐसा अमावस-रात थी वो
और अपने को यक़ीं था चाँदनी पर

नज़र तो हम भी आ जाते उसे जो
बराबर रौशनी पड़ती सभी पर

नए तो हैं यक़ीनन इस लिए आप
भरोसा कर रहे हैं ख़ुद-कुशी पर

अभी जीवन से तू महरूम है यार
तभी इतरा रहा है मय-कशी पर

सितम अब ये है वो लौट आया है और
हमारा आ गया है दिल किसी पर

किसी से तुम मोहब्बत कर लो वर्ना
सवाल उठता रहेगा दोस्ती पर

— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'

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