फ़क़त दो लठों पर सुला देना मुझ कोख़तावार हूँ तो सज़ा देना मुझ कोमेरी आत्मा जब हवा में मिलेगीतो इक शे'र पढ़ के जला देना मुझ को— Rakesh Mahadiuree