मुँह ज़बानी न जताता कि मोहब्बत क्या है
मैं तुझे कर के दिखाता कि मोहब्बत क्या है
कैसे सीने से लगाऊँ कि किसी और के हो
मेरे होते तो बताता कि मोहब्बत क्या है
ख़ूब समझाता तुझे तेरी मिसालें दे कर
काश तू पूछने आता कि मोहब्बत क्या है
As you were reading Shayari by Rana Saeed Doshi
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