ना-समझ है अभी बे-ख़बर है अभी
शाम होने को है दो-पहर है अभी
काट दो फोन तुम बात समझो ज़रा
मेरी अम्मी से मुझ को ख़तर है अभी
जानवर ही समझ उस की ख़िदमत करो
वो जवाँ है अभी कार-गर है अभी
— Raushan miyaa'n
शाम होने को है दो-पहर है अभी
काट दो फोन तुम बात समझो ज़रा
मेरी अम्मी से मुझ को ख़तर है अभी
जानवर ही समझ उस की ख़िदमत करो
वो जवाँ है अभी कार-गर है अभी
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling