नहीं जी लगता जाने क्या हुआ है
धड़कता दिल है मुँह उतरा हुआ है
बहन ने माँ को कल ये भी बताया
किसी चक्कर में ये बहका हुआ है
लकीरें पड़ रहीं माथे पे मेरे
तेरे बिन मन ये घबराया हुआ है
लिया बोसा है मेरे रुख़ पे उस ने
मेरा पूरा बदन महका हुआ है
कोई ये बात बतलाने की थी क्या
कि तुम को इश्क़ ये पहला हुआ है
— Rudransh Trigunayat















