तेरे लहजे की सारी बर्फ़ चुन कर घर बनाऊँगी
मैं अपनी आँख से जो चाहूँगी मंज़र बनाऊँगी
समुंदर दूर की ऐनक से ये तक़्सीम देखेगा
मैं अपनी प्यास का चेहरा तुझे छू कर बनाऊँगी
मेरा ही हौसला है ये बुरी साअत के आने पर
मैं अपना दिल उजाड़ूँगी तुम्हारा घर बनाऊँगी
— Ruqayyah Maalik















