अपनी हद से गुज़र रहा हूँ मैं
यूँ समझ लीजे मर रहा हूँ मैं
इस लिए अश्क गिर रहे मेरे
याद तुझ को जो कर रहा हूँ मैं
मैकदे में मैं बैठ कर तन्हा
बोतलों से उतर रहा हूँ मैं
— Sabir Pathan
यूँ समझ लीजे मर रहा हूँ मैं
इस लिए अश्क गिर रहे मेरे
याद तुझ को जो कर रहा हूँ मैं
मैकदे में मैं बैठ कर तन्हा
बोतलों से उतर रहा हूँ मैं
Other ghazal from the same pen
Shers of promise.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling