अपनी हद से गुज़र रहा हूँ मैंयूँ समझ लीजे मर रहा हूँ मैंइस लिए अश्क गिर रहे मेरेयाद तुझ को जो कर रहा हूँ मैंमैकदे में मैं बैठ कर तन्हाबोतलों से उतर रहा हूँ मैं— Sabir Pathan