इन दिनों समझो जो हालत है मिरी

सामने बैठा हूँ हिम्मत है मिरी

मय-कशी अब जान ले कर छोड़ेगी
इतनी पीने की जो आदत है मिरी

जिस को जाना है चला जाए मगर
ये न समझे वो ज़रूरत है मिरी

बे-वफ़ा भी है अगर तो क्या हुआ
सब से पहले वो मुहब्बत है मिरी

कुछ नहीं कहना भी बेहतर होता है
बात मानो ये नसीहत है मिरी

— Sagar Sahab Badayuni

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