काश उस की ही तरह मेरी ये किस्मत होती
बे-वफ़ा हो के भी इस दुनिया में इज़्ज़त होती
तुम जहाँ चाहो वहाँ दिल को लगा सकती हो
फ़र्क़ पड़ता तो मुझे तुम से शिकायत होती
अब मिरे पैर पे गिरने से भला क्या होगा
छोड़ कर जाते नहीं मुझ से मुहब्बत होती
इस तरह अपना बना डाला तमाशा हम ने
तू अगर होता तो ये आज न ज़िल्लत होती
हम को आई ही नहीं रास बुलंदी अपनी
वरना कुछ और ही अपनी ये हक़ीक़त होती
मुझ से होती ही नहीं दोस्त ख़ुशामद वरना
आज क़दमों में पड़ी दुनिया की शोहरत होती
— Sagar Sahab Badayuni














