है वो ज़ात-ए-ख़ुदा बर्बर इबादत कर रहे हैं हमइसे ईमाॅं कहो या डर इबादत कर रहे हैं हमयही दीन-ओ-धरम अपना यही अपनी इबादत हैकि प्याला हाथ में ले कर इबादत कर रहे हैं हम'अज़ाबों से तेरी इक पल को राहत मिल सके हम कोइसी ख़ातिर तेरे दर पर इबादत कर रहे हैं हम— Sagar Kaushik