मुझ को मेरी जगह मिली ही नइँ
ये मेरा युग मेरी सदी ही नइँ
आज सब आँसुओं ने धो डाला
आज कोई ग़ज़ल हुई ही नइँ
मेरा कुत्तों से है बड़ा नाता
मेरे कुन्बे में आदमी ही नइँ
आज काफ़ी ख़ुशी का दिन है और
मुझ को इस बात की ख़ुशी ही नइँ
ज़िंदगी मुझ को है अज़ीज़ मगर
मुझ
में अब ज़िंदगी बची ही नइँ
सब को कोई न कोई जल्दी है
एक मैं हूँ कि हड़बड़ी ही नइँ
— Sagar Kaushik















