door rah kar na karo baat qareeb aa jaao | दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ

  - Sahir Ludhianvi

दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ
याद रह जाएगी ये रात क़रीब आ जाओ

  - Sahir Ludhianvi

Neend Shayari

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    भूला नहीं हूँ आज भी हालात गाँव के
    हाँ, शहर आ गया हूँ मगर साथ गाँव के

    दुनिया में मेरा नाम जो रोशन हुआ अगर
    जलने लगेंगे बल्ब भी हर रात गाँव के
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    Tanoj Dadhich
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    जब चाहें सो जाते थे हम, तुमसे बातें करके तब
    उल्टी गिनती गिनने से भी नींद नहीं आती है अब

    इश्क़ मुहब्बत पर ग़ालिब के शेर सुनाए उसको जब
    पहले थोड़ा शरमाई वो फिर बोली इसका मतलब?
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    Tanoj Dadhich
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    ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
    मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

    हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए निजात
    इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए
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    Zaki Azmi
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    मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ
    वो मेरे साथ बसर रात क्यूँ नहीं करता
    Tehzeeb Hafi
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    आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह
    हाथ आए न सितारे तिरे आँचल की तरह
    Ameer Qazalbash
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    किताबें, रिसाले न अख़बार पढ़ना
    मगर दिल को हर रात इक बार पढ़ना
    Bashir Badr
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    एक ही शख़्स नहीं होता सदा दिल का सुकूँ
    एक करवट पे कभी नींद नहीं आ सकती
    Rehan Mirza
    सखी को हमारी नज़र लग न जाए
    उसे ख़्वाब में रात भर देखते हैं
    Sahil Verma
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    क्या बैठ जाएँ आन के नज़दीक आप के
    बस रात काटनी है हमें आग ताप के

    कहिए तो आप को भी पहन कर मैं देख लूँ
    मा'शूक़ यूँ तो हैं ही नहीं मेरी नाप के
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    Farhat Ehsaas
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    मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली
    ऐसा मरने का माहौल बनाया हमने

    घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे
    तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हमने
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    Shariq Kaifi
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More by Sahir Ludhianvi

As you were reading Shayari by Sahir Ludhianvi

    हर तरह के जज़्बात का एलान हैं आँखें
    शबनम कभी शोला कभी तूफ़ान हैं आँखें

    आँखों से बड़ी कोई तराज़ू नहीं होती
    तुलता है बशर जिस में वो मीज़ान हैं आँखें

    आँखें ही मिलाती हैं ज़माने में दिलों को
    अंजान हैं हम तुम अगर अंजान हैं आँखें

    लब कुछ भी कहें इस से हक़ीक़त नहीं खुलती
    इंसान के सच झूट की पहचान हैं आँखें

    आँखें न झुकीं तेरी किसी ग़ैर के आगे
    दुनिया में बड़ी चीज़ मिरी जान! हैं आँखें
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    Sahir Ludhianvi
    तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो
    तुम्हें ग़म की क़सम इस दिल की वीरानी मुझे दे दो

    ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में
    बुरा क्या है अगर ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो

    मैं देखूँ तो सही दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
    कोई दिन के लिए अपनी निगहबानी मुझे दे दो

    वो दिल जो मैं ने माँगा था मगर ग़ैरों ने पाया है
    बड़ी शय है अगर उस की पशेमानी मुझे दे दो
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    Sahir Ludhianvi
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    वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है
    इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा
    Sahir Ludhianvi
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    उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आँसू तौबा
    मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा
    Sahir Ludhianvi
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    ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
    मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
    Sahir Ludhianvi
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