बात करने में जब ख़लल आया
सच ज़बाँ से भी तब निकल आया
वो मुझे टालता रहा अब तक
यार उस का कभी न कल आया
मेरी उम्मीद से बहुत जल्दी
वो ये चेहरा कहीं बदल आया
रोक पाते तो ही सही होता
आँख से अश्क ये उछल आया
कौन 'साकेत' जब सुना मैं ने
दूर ही से मैं फिर निकल आया
— Saket Sharma















