
जनाब-ए-मीर के लहजे की नाज़ुकी की तरह
तुम्हारे लब हैं गुलाबों की पंखुड़ी की तरह
शगुफ़्ता चेहरा ये ज़ुल्फ़ें ये नर्गिसी आँखें
तेरा हसीन तसव्वुर है शा'इरी की तरह
— SALIM RAZA REWA
Other sher from the same pen
Shers of rose.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling