पहली बारिश की कुछ बूँदें ठहरी पत्तों पर

धूप खिली और फिर छाई हरियाली पत्तों पर

आना जाना मौसम की फ़ितरत में होता है
इस मौसम के बा'द में होगी सर्दी पत्तों पर

ख़ैर बहारों का मौसम भी लाते हैं पत्ते
पतझड़ की भी ज़िम्मेदारी होगी पत्तों पर

तुम क्या जानो कितने काम लिए हैं पत्तों से
कितनो ने लिक्खी है प्रेम कहानी पत्तों पर

रोज़ शिकायत रहती है फूलों को माली से
आख़िर उस ने ज़ियादा मेहनत क्यूँ की पत्तों पर

इतनी बात से ही फूलों ने खिलना छोड़ दिया
क्यूँ फूलों से उड़ कर तितली बैठी पत्तों पर

— Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

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Garmi Shayari

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