पत्ते ये कितने अब बे-वफ़ा हो गए
पेड़ से टूट कर जो हवा हो गए
यार बीमार हूँ मैं अभी इश्क़ में
लोग पर क्यूँ मेरे घर जमा हो गए
ख़ुद भटकते रहे जो दवा के लिए
गैरों के मर्ज़ की वो दवा हो गए
खेलते साथ बचपन में जो यार थे
क्यूँ वो होकर बड़े सब जुदा हो गए
महफ़िलों में कभी तुम थे तन्हा "शफ़क़"
लोग सारे वो अब हमनवा हो गए
— Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"















