अब पूछूँ या फिर तब पूछूँ
मैं किस किस का मतलब पूछूँ
है ख़्वाहिश बोसे की लेकिन
रुख़सार जबीं या लब पूछूँ
ये कैसे घाइल करती हैं
मैं आँखों का कर्तब पूछूँ
दिल पर किस को अधिकार दिया
उस से उस का अक़रब पूछूँ
जो देखे देखता रह जाए
क्या सोच बनाया रब पूछूँ
— Sandeep dabral 'sendy'















