बहुत अरसे तलक सहरा रहा है
अभी दरिया से मिलने जा रहा है
किसी से मिलने जाने की ख़बर है
क़मीज़ें क्यूँँ नई सिलवा रहा है
न वो नज़रों से ओझल हो रहा है
न मेरे दिल के भीतर आ रहा है
मुझे लगने लगी है उसकी आदत
जो सारी आदतें छुड़वा रहा है
मेरी आँखें भी अब बे-नींद होंगी
कोई अपना सफ़र में जा रहा है
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