नई मुश्किल में अपना सर न दे दूँ
कि चश्म-ए-तर को चश्म-ए-तर न दे दूँ
शिकारी मुझ सेे रंजिश ले रहे हैं
परिंदों को कहीं मैं पर न दे दूँ
बड़े दिन से मुझे ठुकरा रही है
कहीं अब मैं उसे ठोकर न दे दूँ
तेरी ख़ातिर मुझे डर लग रहा है
मोहब्बत में नया इक डर न दे दूँ
मुझे भी लोग पत्थर मारते हैं
कहीं मजनूँ को भी पत्थर न दे दूँ
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