"इंतिज़ार"
कितनी राहें देखूँ कितना इंतिज़ार करूँ
कह दिया है उस ने दुगना इंतिज़ार करूँ
वो भी तो कभी मेरी तरह इंतिज़ार करे
आख़िर मैं ही क्यूँ तन्हा इंतिज़ार करूँ
फिर मरेगा कोई मजनूँ उस के प्यार में
कह रही है फिर से लैला इंतिज़ार करूँ
इज़हार हो गया इक़रार भी कर लिया
है फिर भी यही दिलासा इंतिज़ार करूँ
ज़िन्दगी है कि मरने नहीं दे रही मुझ को
मौत कह रही है बस थोड़ा इंतिज़ार करूँ
— Sahil Verma















