'इश्क़ की आफतें अल्लाह-अल्लाह
दर्द की शिद्दतें अल्लाह-अल्लाह
बाद मुद्दत के मिलीं हैं मुझको
वस्ल की राहतें अल्लाह-अल्लाह
मार देतीं हैं शब-ए-ग़म से मुझे
हिज्र की वहशतें अल्लाह-अल्लाह
जाने किस सम्त मुझे ले जाएँ
पाँव की हिजरतें अल्लाह-अल्लाह
शाम डूबी तो नुमायाँ होंगी
दिल की ये हसरतें अल्लाह-अल्लाह
बेश्तर भूल गया मैं ख़ालिक़
तेरी सब नेमतें अल्लाह-अल्लाह
'इश्क़ में मोल ख़रीदीं मैंने
बे असर राहतें अल्लाह-अल्लाह
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