चाँद तारे और ज़मीं आसमाॅं ख़ामोश हैदेख कर तुझ को ये सारा जहाँ ख़ामोश हैसोचता था मैं बयाँ करता हाल-ए-दिल तुम्हेंतुम नज़र के पास हो तो ज़बाँ ख़ामोश हैकाश मेरे दिल की ही इक दफ़ा तो सुनते तुमचुप ज़बाँ है दिल मिरा तो कहाँ ख़ामोश है— Shahanwaz Ansari