हर दफ़ा दिल ये तुम पे वार आएतुम नज़र मुझ को जितनी बार आएआओ जब तक न तुम अयादत कोकैसे बीमार को क़रार आएदिन तुम्हारे ख़याल में गुज़राआज तुम याद बेशुमार आएचंद लम्हे मिले थे साथ उस केवक़्त बातों में हम गुज़ार आए— Shahanwaz Ansari