कौन किसी का सुनता दुख है
सब को अपना अपना दुख है
प्यार मोहब्बत घर की उलझन
सब को वही पुराना दुख है
तुझ से जुदा हो कर ही समझा
आख़िर कैसा होता दुख है
— Shahanwaz Ansari
सब को अपना अपना दुख है
प्यार मोहब्बत घर की उलझन
सब को वही पुराना दुख है
तुझ से जुदा हो कर ही समझा
आख़िर कैसा होता दुख है
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