तू अगर जो मुझे मिला होता

ज़ख़्म फिर दिल का भर गया होता

ज़िंदगी साथ अगर बसर होती
ज़िंदगी से न फिर गिला होता

फिर भला कैसी होती ये दुनिया
गर जो इंसान बा-वफ़ा होता

हम बताते कि क्या मुहब्बत है
तेरा गर हम से राब्ता होता

ज़िक्र उस का न कर के ठीक किया
सुन के दिल ग़म में मुब्तिला होता

— Shahanwaz Ansari

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