दुश्मनों से मुझे गिला ही नहींप्यार तू ने भी तो किया ही नहींमैं ने सीने पे जिस का नाम लिखायार बस वो मुझे मिला ही नहींकितना चीख़ा मैं तेरी यादों मेंमेरे लब पे कोई सदा ही नहींनब्ज़ देखो ना अब तबीब मेरीइश्क़ के रोग की दवा ही नहींतुम को ये वहम हो गया शायदमक़्ता शाकिर ने तो कहा ही नहीं— Shakir Sheikh