मत ये पूछो हाल क्या अपना बनाए बैठा है
ज़ख़्म अपने सीने पे वो अब सजाए बैठा है
दुनिया वालो की नज़र में ख़ुश बहुत वो है मगर
वक़्त की वो चाल पे नज़रे लगाए बैठा है
लोग कहते है कि ज़िंदा तो नज़र आता है वो
कौन जाने लाश अपनी वो उठाए बैठा है
धीरे धीरे फिर गुनाहों का बना वो देवता
इस लिए वो ख़ुद का अब चेहरा छुपाए बैठा है
— Sahir banarasi















