तेरी दुनिया में ख़ुदा कितने फ़राइज़ हो गए
नाम तेरा ले ख़ुदा अब क़त्ल जाइज़ हो गए
वो मुहब्बत आज कल हम को पढ़ाने हैं लगे
हम भी देखें अब ज़रा वो कितने फ़ाइज़ हो गए
धीरे धीरे प्यार का नश्शा उतरने जो लगा
जितने आशिक़ थे वो पंडित और वाइज़ हो गए
रात भर बोसे बदन पर उन के जो पड़ते रहे
इस लिए उन की ज़रूरत अब लज़ाइज़ हो गए
— Sahir banarasi















