अब किसी दूजे से उन को प्यार है

ये पुराना उन का कारोबार है

एक दिन मिल कर ख़ुदा से जाना ये
वो निभाता झूठा इक किरदार है

जिस के क़िस्से बेवक़ूफ़ी के सुने
बन गया हम सबका वो सरदार है

साथ जिस के बीता था बचपन मिरा
बन गया वो आज हिस्सेदार है

आज उस की बात सुन मैं दंग था
बाप उस के घर किराएदार है

जो लगाते आग हैं उन से कहो
मुल्क ये उन का भी तो घर बार है

आज चुप है जो कभी चिल्लाती थी
प्यार है हाँ प्यार है बस प्यार है

आज कल सच क्यूँ न आता सामने
आज कल तो बिक गया अख़बार है

ये जो होंठों पे लगी साहिर तिरे
चीज़ ये सिगरेट बड़ी बेकार है

— Sahir banarasi

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