सुना है आपने उस शहर को भुलाया है
वो जिस ने आप को हरदम गले लगाया है
हमें तो हज़रत-ए-वाइज़ बना दिया तुम ने
मुसलमाँ हूँ मैं जभी से तुझे बताया है
सुना है गालों पे तेरे निशान है अब तक
वो रात मैं ने जिसे होंठों से बनाया है
हमें हुई न मुहब्बत कभी मगर यारो
यक़ीन झूठा उसे रोज़ ही दिलाया है
लिबास लाल बिना शादी दूँ तुझे कैसे
बहू का जोड़ा है माँ ने ये कह सिलाया है
— Sahir banarasi















