na jaane kyun us bewafa par rah rah kar pyaar aa.e | ना जाने क्यूँ उस बेवफ़ा पर रह रह कर प्यार आए

  - Shashank Tripathi

ना जाने क्यूँ उस बेवफ़ा पर रह रह कर प्यार आए
वो जो चली आए तो इस बेचैन दिल को करार आए

उस सेे नफ़रत करने को ढूंढते रहे हम महज़ इक बहाना
इस दिल को मगर मोहब्बत करने के बहाने हज़ार आए

उसकी आँखें ऐसी की जो भी देखे, उन
में डूब जाए
हम वो मुहाजिर कि जो निकल कर इस पार आए

कितनी ख़ामोशी से सुनता था उसकी सारी बातें "निहार"
उसका जाना हुआ कि दिल से सैलाब-ए-अशआर आए

उसने कहा था कभी कि मिलेंगे फिर अगले इतवार को
हम आज भी बैठे हैं इंतज़ार में कि कब वो इतवार आए

  - Shashank Tripathi

Dushman Shayari

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