मैं सच कहूँ तो एक ये किस्मत नहीं अच्छी मेरी
और दूसरी बचपन से ही सूरत नहीं अच्छी मेरी
सिगरेट जैसी एक आदत मान बैठा हूँ तुम्हें
ये भी मुझे मालूम है आदत नहीं अच्छी मेरी
कम देखता हूँ आइने में चेहरा अपना तब से मैं
जब से कहा है तू ने ये सूरत नहीं अच्छी मेरी
कमज़ोरी अपनी दुश्मनों में भी बता देता हूँ मैं
मुझ को पता भी है कि ये फ़ितरत नहीं अच्छी मेरी
आदत बनाओगी मुझे तो छोड़ दूँगा मैं तुम्हें
मुझ से मोहब्बत ठीक है आदत नहीं अच्छी मेरी
— karan singh rajput















