उसे अपनी दिखी है कब कमी मुझ

में
मुकरना था तुझे फिर क्यूँ बसी मुझ
में

तड़पता हूँ मैं अब तक भी कहानी में
मरा वो शख़्स ज़िंदा है अभी मुझ
में

उसे इक रोज़ मिल कर हाथ माँगा था
चली वो छोड़ के खु़द को गई मुझ
में

डराकर आसमाँ से शय सी उतरी है
वहीं पे अब जहाँ तुम उतरी थी मुझ
में

मेरी गु़र्बत तो देखी उस सितमगर ने
मुहब्बत ही नहीं देखी गई मुझ
में

— Aalam mani

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