आप की जब हमीं पे नेमत थीज़िंदगी कितनी ख़ूब-सूरत थीआपने भी नसीहतें ही दीपर हमें साथ की ज़रूरत थीतुम जिसे दास्ताँ समझते होदोस्तों वो मिरी हक़ीक़त थी— Shivam Prajapati