गँवा दी उम्र करने में बड़ा उस को
तमाशा ही लगा ये सब ख़ुदा उस को
जवानी जोश में मग़रूर है लड़की
बुढ़ापे का नहीं शायद पता उस को
ज़माना जीत सकता था यहाँ जो शख़्स
सियासत ने अपाहिज कर दिया उस को
बहुत खेले दिलों के खेल उस ने दोस्त
लगी होगी किसी की बद-दुआ उस को
किसी ने ख़ुद-कुशी भी की तो ऐसे की
सभी कहने लगे थे हादसा उस को
— Shivam Prajapati















