is gham-e-dil ke chaman ki raatraani ke li.e | इस ग़म-ए-दिल के चमन की रातरानी के लिए

  - Shivang Tiwari

इस ग़म-ए-दिल के चमन की रातरानी के लिए
आ गए हैं अश्क सारे बाग़बानी के लिए

रतजगे तुम भी करो इस ख़ुदकुशी की आस में
'इश्क़ कहते हैं जिसे सब मेह्रबानी के लिए

शाम तन्हा, दर्द गहरा और ये काग़ज़-क़लम
सब इकट्ठा हैं ग़ज़ल की तर्जुमानी के लिए

मुफ़लिसी दो रोटियों में जश्न करती है मगर
ये अमीरी क़त्ल करती राजधानी के लिए

ओस की इक बूँद सी जब ज़िन्दगी की दास्ताँ
क्यूँ भला सपने सजाऊँ ज़िन्दगानी के लिए

  - Shivang Tiwari

Festive Shayari

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