@intzar_akhtar
Intzar Akhtar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Intzar Akhtar's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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फ़ख़्र से कह सकता हूँ मैं ने एक सितारे को छू रक्खा है
हाँ-हाँ वही-वही जिस को तुम अपने काँधे का तिल कहती हो
अब मेरे बाद ऐसा लड़का तुम को फिर न मिलेगा
जो दौर-ए-कंप्यूटर में भी ख़ून से ख़त लिखता हो
क्यूँ मुझे ऐसा कभू लगता है
चाँद के रिश्ते में तू लगता है
मैं ने अब छोड़ दिया दिल का काम
दिल के कामों में लहू लगता है
ये कह के उस की सहूलियत का ख़याल रक्खा है मैं ने ख़ुद ही
अगर मैं पूछूँ कि बात हो सकती है हमारी तो कहना "ऊँ हूँ"
बड़े सलीक़े से उस ने मेरे दिल को तोड़ा है
उन बातों पे भी "हाँ" कह के जिन पे "नहीं" कहना था
हम ने दुनिया भर में इक को चाहा शिद्दत देखिए
और उसने दूसरे को चाहा क़िस्मत देखिए
इस पे क्या रोना कि तुम मुझ को नहीं मिल पाए
लाख बादल बरसे, धरती कब मिलेगी उस को
इस तरह मैं ने हवस पर इश्क़ को तरजीह दी
उस का माथा चूमा भी तो हाथ रख के चूमा है
ख़ुशी है कि मेरे दिल में ही रह रहे हो तुम
सितम है कि तुम को ढूँढते फिर रहे हैं हम
कोई पूछे कि बतलाओ किसे तुम इश्क़ कहते हो
तो कह देना उदासी के फ़लक पे दर्द का इक चाँद
हम उस के 'ऊँ हूँ' 'तो क्या' 'नईं' पर इस लिए भी रुके हैं
महबूब ज़िद्दी न हो तो फिर आशिक़ी बे-मज़ा है