कुछ पलों में तीरगी है ज़िन्दगी
बा'द इस के रौशनी है ज़िन्दगी
हौसला हर हाल रखना दोस्त तुम
बा'द ग़म के फिर ख़ुशी है ज़िन्दगी
है ज़रूरी क्या तुम्हें ही सोचना
और भी तो कुछ बची है ज़िन्दगी
समझो तो तुम भी समझ जाओगे ही
कैसे अब ये कट रही है ज़िन्दगी
मैं शिकायत क्यूँ करूँ अब तुम से कुछ
जो है जैसी है सही है ज़िन्दगी
— Shivang Tiwari















