"मैं और वो"
होंठ उन के
नहीं फूल हैं वो तो
और आँखें क्या
पैमाने हैं
हाथ
रुमाल हैं मलमल के
तो आप उन के
दीवाने हैं
हँसी उन की
नहीं सुर हैं वो तो
बोल उन के
वो गाने हैं
अरे हैं क्या वो
हाए नूर-ए-इलाही
फिर आप क्या हो
परवाने हैं
क्या प्यारे हैं
हाँ सब से ज़्यादा
नाज़ुक हैं
पलकों से ज़्यादा
कब आए वो
बस कुछ दिन पहले
और राब्ते
बहुत पुराने हैं
— Shubham Thind 'Lafzbaaz'















