सुना है मुस्कुरा कर ग़म भुलाया जा नहीं सकता
मगर ये मुस्कुराना भी तो ज़ाया' जा नहीं सकता
कहानी रोज़ पढ़ते हैं मुहब्बत और नफ़रत की
मुहब्बत को कभी नफ़रत से पाया जा नहीं सकता
जहाँ भी होती है वो फ़िक्र बच्चों की ही करती है
कभी बच्चों के सर से माँ का साया जा नहीं सकता
अगर दो चार दिन की बात हो कर लें दिखावा पर
हमेशा टूट कर के मुस्कुराया जा नहीं सकता
— Sani Singh















