meraa kamra anokhi raushni se bhar gaya hai | मेरा कमरा अनोखी रौशनी से भर गया है

  - Satya Prakash Soni

मेरा कमरा अनोखी रौशनी से भर गया है
तुम्हारी मुस्कुराहट है‌ या कोई कीमिया है

हमारा ज़ाविया दोनों से उल्फ़त का जुदा है
अगर हिंदी है माँ, उर्दू हमारी प्रेमिका है

मेरे अहबाब पर‌ राज़ ए मुहब्बत ना खुले, सो
किताबों पर तुम्हारा नाम उर्दू में लिखा है

तरसते लब नज़रअंदाज़ियाँ कब तक सहेंगे
कभी‌ माथा कभी दिलबर हथेली‌ चूमता है

कोई इल्ज़ाम ना आएगा तुम जो मुड़ गये तो
मिरी जानां अभी तो 'इश्क़ की ये इब्तदा है

  - Satya Prakash Soni

Raaz Shayari

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