मेरा कमरा अनोखी रौशनी से भर गया है
तुम्हारी मुस्कुराहट है या कोई कीमिया है
हमारा ज़ाविया दोनों से उल्फ़त का जुदा है
अगर हिंदी है माँ, उर्दू हमारी प्रेमिका है
मेरे अहबाब पर राज़ ए मुहब्बत ना खुले, सो
किताबों पर तुम्हारा नाम उर्दू में लिखा है
तरसते लब नज़रअंदाज़ियाँ कब तक सहेंगे
कभी माथा कभी दिलबर हथेली चूमता है
कोई इल्ज़ाम ना आएगा तुम जो मुड़ गये तो
मिरी जानां अभी तो 'इश्क़ की ये इब्तदा है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Satya Prakash Soni
our suggestion based on Satya Prakash Soni
As you were reading Raaz Shayari Shayari