फ़ानी हूँ ये बता के मुझे दुख दिया गया
या'नी मुझे बना के मुझे दुख दिया गया
मैं ख़ुद को ढूँढ़ता ही रहा उस में उम्र-भर
क़िस्सा मेरा सुना के मुझे दुख दिया गया
पहले मुझे कहा गया कुछ देखना नहीं
और फिर दिया जला के मुझे दुख दिया गया
जिस पुर-सुकून नींद में था पुर-सुरूर ख़्वाब
उस नींद से जगा के मुझे दुख दिया गया
अनमोल हूँ ये कह के ख़ुशी दी गई मगर
क़ीमत मेरी लगा के मुझे दुख दिया गया
जिस हुस्न को दिखा के दिया दुख जहान को
मुझ से वही छुपा के मुझे दुख दिया गया
मैं बोरिया-नशीन बयाँ किस तरह करूँ
जो तख़्त पर बिठा के मुझे दुख दिया गया
'तैमूर' उस से शिकवा करूँ किस लिए कि जब
हिम्मत मेरी बढ़ा के मुझे दुख दिया गया















