हिज्र में है याद वो शब भर सितारे देखना

इस किनारे देखना और उस किनारे देखना

हो रहेगा जब तुम्हारा चाँद तारे देखना
आ के पल भर को सही कुछ ग़म हमारे देखना

चाँद तारे आब-जू या फूल जुगनू तितलियाँ
देख कर तुझ को किसे है ये नज़ारे देखना

घुल गई है फ़िक्र-ए-फर्दा जब से नींदों में मेरी
हो गए हैं ख़्वाब मेरे ख़्वाब सारे देखना

— Imtiyaz khan

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