उसे जिस सेे था बेहद प्यार वो मैं था
था उसके इश्क़ में बीमार वो मैं था
जुदा कोई नहीं कर सकता था हमको
मगर जो बीच थी दीवार वो मैं था
उसे तो डर नहीं था इस ज़माने का
बने बैठा था पर्दा दार वो मैं था
नहीं था वक़्त उसके पास पढने को
पढ़ा जो पीर से इतवार वो मैं था
वो थे इस पार तेरे साथ आवारा
खड़ा था जो कहीं उस पार वो मैं था
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